रविवार, 2 अक्तूबर 2011

ग़ज़ल - तिनका तिनका टूटा है



तिनका तिनका टूटा है-
दर्द किसी छप्पर सा है-

आँसू है इक बादल जो
सारी रात बरसता है-

सारी खुशियाँ रूठ गईं
ग़म फिर से मुस्काया है-

उम्मीदों का इक जुगनू
शब भर जलता बुझता है-

मंजिल बैठी दूर कहीं
मीलों लम्बा रस्ता है-

ख़्वाहिश जैसे रोटी है
दिल, मुफ़लिस का बेटा है-

किसकी खातिर रोता तू
कौन यहाँ पर किसका है-

7 टिप्‍पणियां:

  1. अथ आमंत्रण आपको, आकर दें आशीष |
    अपनी प्रस्तुति पाइए, साथ और भी बीस ||
    सोमवार
    चर्चा-मंच 656
    http://charchamanch.blogspot.com/

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  2. किसकी खातिर रोता तू
    कौन यहाँ पर किसका है-
    बहुत अच्छे ज़नाब !

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  3. कौन यहाँ पर किसका है ...
    तल्ख़ सच्चाई है !

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  4. वाह! क्या बात है...
    सुन्दर गज़ल बन पडी है....
    सारे शेर उम्दा हैं...
    सादर बधाई...

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  5. aap aaye nahin

    चर्चा-मंच 656
    http://charchamanch.blogspot.com/

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  6. ग़ज़ल पसंद करने के लिए आप सब का तहे दिल से शुक्रिया. :)

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