यहाँ सिर्फ ग़ज़लें, नज्में या मजमुए ही नहीं.. .. यहाँ मेरे जज़्बात हैं, जिन्हें शायद कभी मैं अपनी जुबां से कहने में चूक गया.. .. यहाँ मेरी तन्हाईयाँ हैं, जो अचानक से मुझे खुश करती हैं तो कभी रुला देती हैं.. .. यहाँ मेरे तजुर्बे हैं, जो मैंने ज़िन्दगी की राह पे चलते वक़्त इधर-उधर से बटोरे हैं..
रविवार, 2 अक्टूबर 2011
गुरुवार, 5 मई 2011
सुबह, शाम और रात..
जब सपने में देख रहा था तुम्हें ही छुप-छुपकर
और फिर तुम्हारी ही आवाज से नींद खुली थी मेरी
मानों धप्पा मारा हो किसी ने 'आईस-बाईस' में
और फिर तुम्हारी ही आवाज से नींद खुली थी मेरी
मानों धप्पा मारा हो किसी ने 'आईस-बाईस' में
एक शाम थी..
जब मेरी किसी बात से चिढ़कर तुमने कसकर एक
मुक्का मारा था मेरी पीठ पर और खुद ही रो पड़े थे
मानों कोई बच्चा गलती करके लिपट गया हो माँ से
जब मेरी किसी बात से चिढ़कर तुमने कसकर एक
मुक्का मारा था मेरी पीठ पर और खुद ही रो पड़े थे
मानों कोई बच्चा गलती करके लिपट गया हो माँ से

एक रात थी..
जब दो घंटे और तैंतीस मिनट बातें करने के बाद
'गुड नाइट' कहकर तुमने फोन रखा तो ऐसा लगा
मानों बीच में ही रुक गया हो कोई फेवरिट सा सौंग
जब दो घंटे और तैंतीस मिनट बातें करने के बाद
'गुड नाइट' कहकर तुमने फोन रखा तो ऐसा लगा
मानों बीच में ही रुक गया हो कोई फेवरिट सा सौंग
सोचता हूँ, कभी मैं भी अमीर था कारूँ जितना
सोचता हूँ, कभी मुझ पर भी खुदा मेहरबान था
सोचता हूँ, कभी मुझ पर भी खुदा मेहरबान था
***
शुक्रवार, 29 अप्रैल 2011
विकर्षण
कभी पढ़ा था..
जब दूरियाँ कम
हो जाती हैं
एक हद से ज्यादा,
तो अणुओं में
विकर्षण होने लगता है..
तेरे-मेरे दरमियान
जब दूरियाँ कम
हो जाती हैं
एक हद से ज्यादा,
तो अणुओं में
विकर्षण होने लगता है..
तेरे-मेरे दरमियान
जो दरारें बनी थीं,
उनकी वज़ह मुझे
अब जाकर मालूम हुई..
अब जाकर मालूम हुई..
बुधवार, 12 जनवरी 2011
ख़यालात की हदें
ये जो मेरे ख़यालात हैं न..
दरिया में तहलील बूंदों की माफिक
तुम में अपने मायने ढूंढते हैं..
ये चाहें धूप में पिघल जाएँ
भाप की शक्लें पहनकर
या मीलों कर लें परवाज़
कहीं बादलों में छुपकर
गुलाब की पंखुड़ियों से झांकें
ओस की शक्लों में
या फिर किसी टूटे पत्ते
की मानिंद उड़ते रहें इधर-उधर
ये बहुत कोशिशों के बाद
अब भी 'तुम' तलक ही पहुँच पाते हैं..
तुमने तो अब ख़यालात की भी हदें बाँध दी हैं...
(तहलील= विलीन / डूबा हुआ / immersed; मायने= अर्थ / meaning; परवाज़= उड़ान)
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