ढूँढ़ते क्या हैं कू-ब-कू? कहिये -
आख़िरश किसकी जुस्तजू? कहिये-
और कहिये जनाब! कैसे हैं?
कैसा है मेरा लखनऊ? कहिये!-
आप लिखते थे- 'तुम मुहब्बत हो'
अब यही बात रू-ब-रू कहिये -
क़त्ल का दिन भी अब बता दीजे
पूछते हैं जो - "आरज़ू कहिये" -
मुंजमिद जो पड़ा हो बरसों से
क्या सबब है उसे लहू कहिये -
काम की एक बात से पहले
बातें दो-चार फ़ालतू कहिये -
शोर बिन बेअसर है हर जादू
आप बस एक बार 'छू' कहिये -
क्या कहा - लखनऊ से आते हैं?
फिर ये क्या है 'तड़ाक-तू'? कहिये! -
[कू-ब-कू = गली-गली; आख़िरश = अवशेष; जुस्तजू = तलाश; रू-ब-रू = Face to Face; मुंजमिद = जमा हुआ/ठण्डा; सबब = कारण]
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