सोमवार, 1 जून 2026

ग़ज़ल - ढूँढ़ते क्या हैं कू-ब-कू? कहिये -

 ढूँढ़ते क्या हैं कू-ब-कू? कहिये -

आख़िरश किसकी जुस्तजू? कहिये-


और कहिये जनाब! कैसे हैं?

कैसा है मेरा लखनऊ? कहिये!-


आप लिखते थे- 'तुम मुहब्बत हो'

अब यही बात रू-ब-रू कहिये -


क़त्ल का दिन भी अब बता दीजे

पूछते हैं जो - "आरज़ू कहिये" -


मुंजमिद जो पड़ा हो बरसों से

क्या सबब है उसे लहू कहिये -


काम की एक बात से पहले

बातें दो-चार फ़ालतू कहिये -


शोर बिन बेअसर है हर जादू

आप बस एक बार 'छू' कहिये -


क्या कहा - लखनऊ से आते हैं?

फिर ये क्या है 'तड़ाक-तू'? कहिये! -


[कू-ब-कू = गली-गली; आख़िरश = अवशेष; जुस्तजू = तलाश; रू-ब-रू = Face to Face; मुंजमिद = जमा हुआ/ठण्डा; सबब = कारण]